पता नहीं कब और कैसे गलतफहमियां बढ़ गई... छोटी-छोटी सी बातें क्यों राई का पहाड़ बन गईं.. पता नहीं कब और कैसे गलतफहमियां बढ़ गई... छोटी-छोटी सी बातें क्यों राई का पहाड़ ...
लगा की जाने से पहले कुछ सपने सपने रह गए लगा की जाने से पहले कुछ सपने सपने रह गए
मेरी बातों की चाय, यादों की नमकीन, और स्वागत में मेरी मुस्कान, आओगे ना। मेरी बातों की चाय, यादों की नमकीन, और स्वागत में मेरी मुस्कान, आओगे ना।
मन में आज भी वह परिस्थिति कचोटती है अधूरे दर्शन की ,जब हमे अपनी मजबूरियों पर झुकना पड़ा मन में आज भी वह परिस्थिति कचोटती है अधूरे दर्शन की ,जब हमे अपनी मजबूरियों पर झुक...
ये वीकेंड भी यूं ही गुजर गया.. ये वीकेंड भी यूं ही गुजर गया..
डरे डरे से आधे अधूरे मरे मरे। डरे डरे से आधे अधूरे मरे मरे।